Kids Story in Hindi | बच्चों को प्रेरित करने वाली हिंदी कहानी

Kids Story in Hindi

यह कहानी सभी ऐसे बच्चों और बड़े लोगों के लिए है जो स्वार्थ में आ जाते है, आप इस कहानी को पड़ने के बाद निश्च्य ही स्वार्थ करना छोड़ देंगे | निचे दी हुई कहानी को ध्यान से पढ़े और अपनी ज़िंदगी में लागू करने का प्रयास करें | Kids Story in Hindi – 

विशेष तौर पर यह कहानी बच्चों के लिए है क्योकिं उनका अभी सीखने का समय है, अगर आपके घर में भी बच्चें है तो उनको जादुई घंटी वाली जरूर सुनाये – Kids Story in Hindi

जादुई घंटी की कहानी

एक जंगल में एक बूढ़ी औरत रहती थी | उसके दो बेटे थे बड़ा लड़का सोहन और छोटा लड़का चीनू | सोहन बड़ा लड़का था इसलिए घर का सारा खर्च उसी को उठाना पड़ता वह दिन भर सारे गांव की भेड़ बकरियों को चराने का काम करता था |

Kids Story in Hindi

सुबह सुबह वह गांव जाता और वहां से गांव की सभी भेड़ बकरियों को पहाड़ पर चराता तथा शाम को वापस गांव में छोड़ देता | पूरा दिन काम करने के बाद सोहन को बदले में एक आना दिया जाता था, इसी कमाई से सोहन का घर चलता था |

घर की आमदनी बहुत कम थी इसलिए सोहन का परिवार स्वादिष्ट खाना नहीं खा पाता था, हर रोज रोटी चटनी खाकर ही सोना पड़ता | चीनू छोटा था उसे समझ नहीं थी वह खाना खाते समय अपनी मां को कहता की मां क्या हर रोज वही रोटी चटनी मुझे कुछ अच्छा भोजन चाहिए |

Hindi Motivational Story

वह बूढ़ी औरत अपने छोटे बच्चे चीनू को समझाते हुए कहती की बेचारा सोहन पूरा दिन काम करके हमारे लिए रोटी कमाता है इसलिए तुम ऐसा ना बोलो और जैसा खाना है उसे ही खा लो | छोटा बच्चा चीनू निराश होकर रोटी चटनी खाता है |

एक दिन जब सोहन भेड़ बकरियों को चलाने के लिए पर्वत पर पहुंचा तो उसने देखा कि एक लकड़हारा बहुत बड़े पेड़ को काट रहा था | सोहन को बड़ा गुस्सा आया परंतु उसने समझदारी से काम लिया |

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वह उस लकड़हारे को बोला कि अरे अरे तुम यह क्या कर रहे हो क्या तुम नहीं जानते, कि इस पेड़ के ऊपर डायन रहती है तथा जो कोई भी इसे  नुकसान पहुंचाता है वह उसको मार देती है इसलिए जब तक वह डायन नीचे आए तुम यहां से भाग जाओ |

यह बात सुनते ही वह लकड़हारा वहां से भाग गया उस लकड़हारे के जाने के बाद पेड़ की आत्मा प्रकट हुई और सोहन को बोली कि अगर आज आप नहीं होते तो मैं मारा जाता | खुश होकर पेड़ की आत्मा ने सोहन को एक छोटी-सी घंटी उपहार में दी |

सोहन को यह छोटा-सा उपहार पसंद नहीं आया और वह बोला अरे यह क्या, मैं क्या करूंगा इस छोटी-सी घंटी का | पेड़ की आत्मा बोली की यह कोई छोटी मोटी घंटी नहीं है बल्कि यह बहुत ही चमत्कारी घंटी है | 

इस घंटी की सहायता से तुम खाने के लिए जो वस्तु इसको बोलोगे वही यह तुम्हें ला कर देगी | परंतु याद रखना इस घंटी का प्रयोग तुम दिन में सिर्फ एक बार ही कर पाओगे |

सोहन खुश होकर अपने घर जाता है और अपनी मां को सारी बात बताता है | जब चीनू को इस बात का पता लगा तो उसने खाने के लिए रोटी, दाल, चावल, जलेबी इत्यादि भोजन की मांग करीं | जादुई घंटी ने सारा भोजन तुरंत ही सबके समक्ष प्रस्तुत कर दिया |

एक दिन जब सोहन भेड़ बकरियां चरा के घर आया तो उसने देखा कि छोटा चीनू पहले ही भोजन मंगाकर खा चुका है | सोहन को बहुत भूख लगी थी उसने घंटी से भोजन की माँग कि परन्तु भोजन नहीं आया, तभी सोहन को पेड़ की कहीं हुई बात याद आई | जादुई घंटी दिन में सिर्फ एक बार ही भोजन देती थी |  

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अगले दिन जब सोहन भेड़ बकरियां चुराने के लिए गया तो वह उस जादुई घंटी को भी साथ ले गया | छोटा चीनू और बूढ़ी मां उस घंटी को घर पर ढूंढते रहे परंतु उनको घंटी कहीं नहीं मिली |

जब शाम को सोहन घर आया तो उसकी मां बोली- बेटा तुमने यह क्या किया, क्या तुम्हें परिवार की कोई परवाह नहीं है छोटा चीनू कब से भूखा मर रहा है | तुम हमें बुखा छोड़कर कैसे जा सकते हो | 

सोहन को अपने आप में बहुत बुरा महसूस हुआ और वह बोला की मां मुझे माफ कर दो मैं थोड़ा स्वार्थी हो गया था | आज के बाद ऐसा कभी भी नहीं होगा |

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कहानी से शिक्षा – इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि कभी भी स्वार्थ नहीं करना चाहिए अपने साथ-साथ दूसरों का भी ध्यान रखना बहुत ही आवश्यक है | 

Adhure Gyan ki Khani

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