हितोपदेश श्लोक Hitopadesh Shlok : Sanskrit Shlok Hindi

By | August 15, 2018

हितोपदेश श्लोक

हितोपदेश से लिए हुए बहुत ही महत्वपूर्ण श्लोक जो आपके जीवन में बहुत ही उपयोगी सिद्ध हो सकते है | इन सभी श्लोकों में तर्क संगत बात बताई हुई है, प्रयास करें की इनको अपनी जिंदगी में लागू किया जाये | 

संस्कृत में श्लोकों के साथ साथ आपको इनका हिंदी में अनुवाद भी वर्णित है | इसलिए आप इन सभी श्लोकों को अच्छे से समझ सकते हो | 

Hitopadesha shlok in hindi

1. सिद्धिः साध्ये सतामस्तु प्रसादात् तस्य धूर्जटेः ।   

    जाह्नवीफेनलेखेव यन्मूध्र्नि शशिनः कला ॥

हिंदी अनुवाद – जिसके मस्तक पर चन्द्रमा की कला, गंगानदी के झागों की राशि के समान विद्यमान है, उस शिवजी की कृपा से सज्जनों का मनोरथ ( कार्य ) सफल हो जावे |

2.  श्रुतो हितोपदेशोऽयं पाटवं संस्कृतोक्तिषु ।

     वाचां सर्वत्र वैचित्र्यं नीतिविद्यां ददाति च ॥

हिंदी अनुवाद – अच्छी प्रकार से पढ़ा गया (समझा गया ) यह ‘हितोपदेश’ नामक काव्य, संस्कृत भाषा बोलने में चतुराई, वचनों की कला में पूरी तरह विचित्रता और निति का ज्ञान प्रदान करता है |

3. अजरामरवत्प्राज्ञो विद्यामर्थं च चिन्तयेत् ।

    गृहीत इव केशेषु मृत्युना धर्ममाचरेत् ॥

हिंदी अनुवाद – बुद्धिमान मनुष्य ( अपने को )बुढ़ापे से रहित तथा अमर के समान समझकर विद्या व धन को प्राप्त करें | मृत्यु ने मानों  बालों से पकड़ रखा है ( यह समझकर ) धर्म का आचरण करना चाहिए |

4. सर्वद्रव्येषु विद्यैव द्रव्यमाहुरनुत्तमम् ।

   अहार्यत्वादनर्घत्वादक्षयत्वाच्च सर्वदा ॥

हिंदी अनुवाद – सदा, न चुराई जाने से, बहुमूल्य होने से और विनाशकारी न होने से सभी पदार्थों में विद्या से उत्तम द्रव्य कोई नहीं कहा गया है अर्थात् विद्या को सर्वोत्तम द्रव्य कहा गया है |

5. संयोजयति विद्यैव नीचगापि नरं सरित् ।

    समुद्रमिव दुर्धर्षं नृपं भाग्यमतः परम् ॥

हिंदी अनुवाद – विद्या ही निम्न व्यक्तियों को कठिनता से प्राप्त होने वाले राजा से मिला देती है | जैसे – नीचे की और बहने वाली नदी कठिनता से प्राप्त होने वाले समू़द्र​ में मिल जाती है | इसके बाद भाग्य पर निर्भर करता है | 

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