Hindi Story अधूरे ज्ञान की कहानी in Hindi हिंदी कहानी

By | August 15, 2018

Adhure Gyan ki Khani

Adhure Gyan ki Khani – यह कहानी एक व्यपारी और एक नाई की होती है | इस कहानी से हमें बहुत ही अच्छी शिक्षा मिलती है | अगर हम  भी इस कहानी से मिली हुई शिक्षा को अपने जीवन में अपनाये तो हमारा जीवन बहुत अच्छा हो सकता है | 

अधूरे ज्ञान की कहानी

एक गांव में गोपाल नाम का बहुत बड़ा व्यापारी होता था | वह बड़ा ही उदार दिल का व्यापारी था तथा पूरे गांव में उसकी उदारता के चर्चे मशहूर थे |

वह व्यापारी बहुत ही दानी था, जितना पैसा वह दिन में कमता उसका आधे से भी ज्यादा दान में दे दिया करता | ऐसा करते-करते उस व्यापारी को बहुत दिन हो गए थे तथा अब उसकी स्थिति एक गरीब जैसी हो गई थी |

जब वह बिल्कुल गरीब हो गया और उसे अपना पेट भरने के लिए अपना घर और सारा सामान तक बेचना पड़ा तो वह भगवान के सामने जाकर रोने लगा | रोते-रोते उस व्यापारी को नींद आ जाती है |

जब वह सोया हुआ  था तो उसके सपने में भगवान प्रकट होते हैं और उसको बोलते हैं कि कल तुम्हारे दरवाजे पर एक ऋषि मुनि आएगा, तुम उसके सिर पर डंडे से प्रहार कर देना और वह ऋषि सोने में बदल जाएगा जिससे तुम अमीर हो जाओगे |

गोपाल को यह बात हजम नहीं हुई और उसने इसे झूठ मानकर अनसुना कर दिया | थोड़ी ही देर बाद किसी ने दरवाजा खटखटाया, गोपाल दरवाजे पर गया तो उसने पाया कि उसका नाई जो हर रोज उसकी दाढ़ी बनाने आता है वह आया है |

Adhure Gyan Ki Khani

गोपाल ने उसे अपनी दाढ़ी बनवा ली और जैसे ही वह नाई जाने लगा तो फिर से किसी ने दरवाजा खटखटाया | इस बार दरवाजे पर एक ऋषि मुनि था गोपाल को अपने सपने वाली बात पर यकीन हुआ और उसने उस ऋषि पर डंडे से प्रहार कर दिया |

जैसे ही गोपाल ने ऋषि को डंडा मारा तभी वह ऋषि सोने में बदल गया | गोपाल ने उस सोने में से थोड़ा सा हिस्सा नाई को भी दे दिया ताकि वह किसी को यह बात ना बताएं |

नाई सोने को लेकर वहां से अपने घर की तरफ चल पड़ा तथा रास्ते में उसके दिमाग में एक बात आई कि क्यों ना वह भी ऋषि मुनि को अपने घर बुलाए और उसे डंडे से मारकर सोना हासिल कर ले |

इसके अतिरिक्त उसने सोचा कि वह एक नहीं बल्कि तीन ऋषियों को अपने घर बुलाएगा ताकि अधिक सोना प्राप्त किया जा सके | इसलिए वह नाई तीन ऋषियों को दावत पर बुलाता है | 

जैसे ही ऋषि मुनि खाना खाने के लिए नाई के घर आए है तो उसने उनको खाना खिलाने के बाद डंडे से मारना शुरू कर दिया, परंतु कोई भी ऋषि सोने में नहीं बदला | तीनों ऋषि-मुनियों में से एक ऋषि जान बचाकर भाग जाता है और रास्ते उसकी मुलाकात गोपाल से होती है | 

गोपाल ऋषि से पूछता है कि वह ऐसे हाँफते हुए क्यों आ रहा है, ऋषि ने गोपाल को सारी बात बताई कि कैसे उस नाई ने हमें दावत पर बुलाकर पीटना शुरू कर दिया | 

यह बात सुनते ही गोपाल भागते हुए नाई के घर पर पहुंचा तथा उस नाई को सारी कहानी बताई | नाई को अपने किए पर बहुत पछतावा होता है और वह ऋषि-मुनियों से माफी मांगता है | इसके अतिरिक्त सारे गाँव में नाई की बेज्ज़ती भी होती है | 

कहानी से शिक्षा – इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें कभी भी अधूरा ज्ञान लेकर काम नहीं करना चाहिए नहीं तो हमारे दशा भी उस नाई  जैसी ही होगी | 

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